एक आदमी के दो पुत्र थे. उनमें से बड़ा भाई बहुत चालाक था तथा दूसरा बुद्धू एवं बहुत सीधे स्वभाव का था. पिता की मृत्यु के बाद दोनों ने आपस मैं पिता की जायदाद का बटवारा किया. बड़े भाई ने ओखल कूटने का काम छोटे भाई को दिया तथा ओखल से कुटा अनाज स्वयं ले लिया . उसने कहा कि चक्की तू चलाएगा तथा उसका सामान मुझे मिलेगा. उसने गाय का भी बटवारा कर दिया और बटवारे मैं गाय का मुंह वाला हिस्सा छोटे भाई को दिया तथा पीछे का हिस्सा खुद ले लिया. एक कम्बल का भी बटवारा हुआ. चालाक भाई ने कहा की कम्बल दिन मैं तेरा होगा तथा रात को मेरा. चावल को भी छोटा छिटेंगा तथा चावल बड़े भाई को मिलेगा.
छोटा भाई दिन भर ओखल कूटता और ओखल का सारा सामान बड़े भाई का हो जाता. चक्की दिन भर छोटा भाई चलाता पर चक्की का सामान बड़े भाई के हिस्से आता. गाय को चारा देने का काम छोटे भाई का होता परन्तु दूध बड़े भाई को मिलता. कम्बल भी बड़ा भाई रात को ओड़ता और छोटा भाई ठण्ड से अकड़ता. छोटा भाई चावल छीट्ता, चावल बड़े भाई के हिस्से आते. छोटा भाई भूखा प्यासा रहता उसको फांका करना पड़ रहा था. पर वह क्या करता.
गाँव वालों को जब यह पता चला तो उन्हो़ने छोटे भाई से कहा की तुम आज से वैसा ही करोगे जैसा हम बताएँगे उन्होंने कहा कि ओखल मैं अनाज पत्थर मिला कर कूटो. उसने ऐसा ही किया. शाम को बड़ा भाई आया उसने पूछा कि तुमने ऐसा क्यों किया. उसने जबाब दिया मेरी मर्जी. ओखल कूटने का काम तो मेरा है.मैं जैसे भी कूटूं.
चक्की चलाने मैं भी उसने चक्की मैं गेहूं के साथ बजरी भी पीस दी. शाम को जब बड़े भाई ने पूछा तो उसने जबाब दिया मेरी मर्जी . गाय को उसने ख़राब और कम चारा दिया तथा दूध दुहते समय वह गाय के मुंह मैं संटी से मारता रहा. इस कारण गाय ने दूध नहीं दिया. बड़े भाई ने पूछा कि तुम ऐसा क्यों कर रहे हो, तो उसने कहा मुहं का हिस्सा तो मेरा है. मैं जो चाहूं करुँ. इसी प्रकार जब कम्बल की बारी आई तो उसने शाम के समय कम्बल को पानी मैं भीगा दिया और बड़े भाई को दे दिया. बड़े भाई ने पूछा की कम्बल क्यों भिगाया तो उसने जबाब दिया मेरी मर्जी दिन मैं तो कम्बल मेरा होता है. चावल छीटने मैं छोटे भाई ने कंकर और पत्थर मिला दिए. बड़े भाई ने पूछा की तुमने ऐसा क्यों किया. उसने जबाब दिया की मेरी मर्जी, चावल छीटने का काम तो मेरा है.
अंत मैं बड़े भाई के समझ मैं आ गया कि बेईमानी से काम नहीं चलने वाला. उसने गाँव की पंचायत बुलवाई और पंचों ने सही बटवारा कर छोटे भाई को उसका हिस्सा दिलवा दिया.
