एक जंगल मैं एक बिरालू (बिल्ला) रहता था. एक दिन वह पानी की तलाश मैं भटक रहा था. उसे एक घड़ा दिखाई दिया.उसने अपनी गर्दन घड़े मैं डाली और अपनी प्यास बुझाई, परन्तु जब वह गर्दन बाहर निकालने लगा तो गर्दन घड़े मैं अटक गई. उसने बहुत कोशिश की परन्तु गर्दन बाहर नहीं निकली. इधर उधर भटकते भटकते वह एक पत्थर की शिला से टकराया. घड़ा फूट गया और ऊपर की गोलाई उसके गले मैं अटक गई. उसने बहुत कोशिश की परन्तु वह रिंग नहीं निकाल पाया.

बिरालू बूड़ा हो चुका था. शिकार करने मैं अशक्त हो चुका था. उसे एक तरकीब सूझी. उसने चूहों की एक सभा बुलाई और चूहों को बतलाया कि अब उसने शिकार करना छोड़ दिया है और अब वह कंद मूल फलों से ही अपना गुजारा करेगा. उसने घड़े के रिंग को दिखाकर कहा की उसने राम नामी रिंग अपने गले मैं डाल ली है. और अब उससे डरने की जरूरत नहीं है.

चूहे बिल्ले की बातों से संतुष्ट हो गए. उसने चूहों से कहा की अब अंतिम समय मैं वह सबको हरिद्वार ले जाना चाहता है उसने बहुत पाप किये हैं. हरिद्वार मैं उनका भी तारण हो जाएगा तुम भी हरिद्वार गंगा जी मैं नहा आओगे. चूहे राजी हो गए. हरिद्वार पहुँच कर उन्होंने जंगल मैं एक टेन्ट लगाया टेन्ट मैं उसने कहा की मैं अन्दर की तरफ सोता हूँ. तुम लोग टेन्ट के दरवाजे की तरफ सो जाओ. चूहों ने कहा कि जंगल मैं शेर बाघ भालू आदि आ सकते हैं. अतः आप बाहर की तरफ सो जाओ. बिरालू तो ऐसा ही चाहता था. बिरालू ने कहा ठीक है. उसने हर रोज बड़े आराम से एक चूहा खाना शुरू कर दिया. चूहे परेशान थे कि हर रोज एक चूहा कहाँ जा रहा है. बिल्ले ने तो अपनी रामनामी चादर दिखा कर कहा कि उसने तो बहुत समय से शिकार करना ही छोड़ दिया है.
चूहों ने आपसी मंत्रणा की. वह बुद्धिमान शियार के पास गए और उन्होने शियार को सब बात बताई. चतुर शियर ने कहा की तुम लोग बिल्ले के पखाने को जांचो, सब मामला साफ़ हो जायेगा. सुबह जब बिरालू पखाना करने बैठा तो चूहों ने देखा की उसके पखाने मैं चूहों के बाल दिखाई दिए.
एक चूहे ने बिल्ली से कहा
यार बिरालू दा, बात कूंछै उस ,
खान्हूं कूंछै कंद मूल ,
हगण हूँ हग्छै मुस
दुसरे चूहे ने कहा.
खांद खेती कंद मूल, हगत खेरी मुसा
गला तेरा कठुल मठुल, क्वीड़ा तेरा उषा
उस दिन से चूहों ने बिरालु का साथ छोड़ दिया.
