चूहे का दामाद

चूहे का दामाद

एक बिल मैं एक चूहा रहता था. उसने सोचा की उसे भी बड़े बड़े लोगों से सम्बन्ध बनाने चाहिए. ऐसा करने से वह भी बड़े लोगों की जमात मैं सामिल हो जायेगा.

उसकी एक सुंदर कन्या थी. वह विवाह योग्य हो चुकी थी. उसने सोचा की किसी बड़े आदमी से इसकी शादी करवा कर खुद भी संभ्रांत जनों मैं सामिल हो सकता हूँ.

वह सबसे पहले सूर्य के पास गया. और उससे अपनी लड़की की शादी का प्रस्ताव रखा. सूर्य ने कहाँ मैं कहाँ शक्तिशाली हूँ. मुझे तो फुर्सत भी नहीं है. दिन रात मैं घूमता रहता हूँ मैं तुम्हारी पुत्री का भरण पोषण कैसे करूंगा . फिर तुम्हारी पुत्री मेरी ज्वाला को नहीं सह पायेगी अतः तुम चन्द्रमा के पास जाओ .

वह चंद्रमा के पास गया. चंद्रमा ने कहा प्रस्ताव तो अच्छा है. परन्तु मेरे चेहरे पर तो दाग है. फिर मैं तो केवल रात को ही बाहर निकलता हूँ. मुझसे ज्यादा ताकतवर तो बादल है जो मुझे जब चाहें ढक लेते हैं. तुम बादल के पास जाओ.

चूहा बादल के पास गया. और अपना प्रस्ताव बादल के सामने रखा. बादल ने कहा की मुझसे ज्यादा ताकतवर तो हवा है वह जब चाहे मुझे उड़ा कर ले जाती है. तुम हवा के पास जाओ.

चूहा हवा के पास गया. उसने भी उसे टरका दिया और कहा की मुझसे ज्यादा तो यह शिलाखंड है यह जब चाहे मेरा रास्ता रोक देता है. फिर मैं तो एक स्थान पर ही पड़ा रहता हूँ. अतः तुम धरती के पास जाओ.

वह धरती के पास गया धरती ने कहा मैं तुम्हारा प्रस्ताव कैसे स्वीकार कर सकती हूँ. मुझे तो पेड़ की जड़ें बाधे रखती हैं. अतः तुम पेड़ के पास जाओ.

वह पेड़ के पास गया और उसने अपना प्रस्ताव रखा. पेड़ ने कहा मैं कहाँ शक्तिशाली हूँ. मेरी जडों को तो तुम कुतर कुतर कर सुखा देते हो. सच्चे मानें मैं सबसे शक्तिशाली तो तुम हो.
अब चूहे ने समझ लिया की चूहा ही सबसे शक्तिशाली होता है. अतः उसने बड़े ही धूम धाम से अपनी लड़की का ब्याह एक खुबसूरत चूहे से करा दिया.

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