प्रेमी - छम्म छिया छम्म

एक औरत अपने प्रेमी से मिलने जंगल जाती थी. वह उसके लिए अच्छे अच्छे पकवान बना कर ले जाती थी. उनकी जंगल मैं रोज मुलाकातें होती थी एक दिन उसकी जेठानी को उस पर शक हुवा वह उसका पीछा करने लगी उसने देखा कि वह पकवान बनाकर बांज के ठूंठ पर रख रही है. जिठानी ने वह पकवान खुद खा लिया. प्रेमी जब आया तो उसे वहाँ कुछ भी नहीं मिला.

घर पर प्रेमिका ओखल कूट रही थी. ओखल कूटते समय ‘शिव’ की आवाज आती है. जिठानी भी आँगन मैं चावल छीट रही थी. चावल छीटने मैं सूप से छम्म की आवाज आती है. प्रेमी हारमोनियम बजा रहा था. उसने हारमोनियम बजाते हुए पूछा . कहाँ धरी आयो रे, सा रे गा माँ पा कहाँ धरी आयो रे , सा रे गा माँ पा. प्रेमिका ने ओखल कूटते हुए जबाब दिया . बांज के ठूंठ मैं शिव. बाज के ठूंठ मैं शिव. जिठानी ने सूप मैं चावल छीटते हुए कहा छम छिया छम्म रोज रोज तुम खां छा आज खै आया हम, छम छिया छम छम छिया छम्म रोज रोज तुम खां छा आज खै आया हम, छम छिया छम( रोज रोज तुम खाते हो, आज पकवान हमने खा लिए.

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