यह एक पुरानी कहानी है. एक गाँव मैं एक गणतुआ रहता था. वह लोगों की समस्याओं का समाधान गणना करके किया करता था और अपना तथा अपने परिवार का जीवन यापन करता था. लोगों को उसके पर्चे लगते भी थे परन्तु गणना हमेशा तो सही नहीं हो सकती इस कारण कभी उसका धंधा ठीक चलता और कभी नहीं चलता. लोग उसके पास पशुवों के खोने तथा चोरी आदि के बारे मैं पूछते थे. कभी कभी अपना धंधा चलाने के लिए पशुवों को गलत दिशा मैं भेज देता था तथा जिसका पशु खोया होता तो उसका आसानी से समाधान कर देता. इस प्रकार उसका जीवन यापन हो रहा था.
एक बार उस गाँव के राजा का जेवर चोरी हो गया. राजा के दरबारियों ने जेवर बहुत खोजा पर जेवर नहीं मिले. इस बीच गणतुआ की भी ठीक ठाक चल रही थी. किसी ने राजा को उसके बारे मैं बतलाया. गणतुआ को राज दरबार मैं हाज़िर होने का फरमान मिला. राजा ने कहा की यदि कल सुबह तलक जेवर नहीं मिले तो गणतुआ का सर कलम कर दिया जायेगा.
परेशान गणतुआ रात को सोने की कोशिस मैं लगा था और चिल्ला रहा था- आ निनुरी आ सिनुरी, भोल तेरी मौत.
अर्थात निद्रा देवी आ जा, कल तो मरना ही है. राजा की दो रानियाँ उधर से गुजर रहीं थीं. उन्होंने गणतुआ की बात सुन ली. इत्तफाक से उन रानियों का नाम निनुरी और सिनुरी था. दोनों ने समझा की गणतुआ को उनका भेद मालूम हो गया है. डर की मारी वे गणतुआ के घर के अन्दर चली गईं और उन्होंने गणतुआ को सही बात बतला दी. उन्होंने बतलाया की जेवर उन दोने ने छुपा रक्खे हैं. उन्होंने ने उस स्थान का नाम भी बतलाया जहाँ पर जेवर छुपाये गए थे गणतुआ की चल पड़ी उसने रानियों को अभय दान दिया तथा दूसरे दिन राज दरबार मैं हाज़िर हो गया. तथा गणना का बहाना कर जेवर का स्थान बता दिया. जेवर मिल गए और एक बार फिर गणतुआ की चल पड़ी. गणना करने का पर्वतीय समाज मैं आज भी प्रचलन है तथा अपनी समस्याओं के समाधान हेतु लोग आज भी गणतुआ के पास जाते हैं तथा बहुत से मामलों मैं गणतुआ के पर्चे सही लगते हैं. गणतुआ को पुछ्यारी आदि कई नामों से पुकारा जाता है.
