जंवाई (दामाद) जी चले सौरास (ससुराल) को.

ब्या (शादी) के बाद पहली दफा सौरास (ससुराल) जाना हर दुल्हे का हसीन सपना होता है. दुल्हे राजा जंवाई या दामाद के रूप मैं जब पहली बार ससुराल जाते हैं तो उनके घर मैं उन्हें अनेकानेक सलाह दी जाती हैं. पुराने ज़माने मैं पक्का भोजन एक बड़ी बात होती थी. [Continue reading.....]

लछिया कोठयारी के किस्से - 2

लछिया कोठयारी के सातों लड़के गर्मी शुरू होते ही भाभर से पहाड़ को वापस आ रहे थे. टनकपुर के पास पहुँच कर उन्हें ख्याल आया कि ईजा (माता) के लिए तो कुछ भी नहीं ले जा रहे हैं. उन्होंने विचार विमर्श किया. सबने महसूस किया कि ईजा को सबसे ज्यादा जरूरत एक घाघरी [Continue reading.....]

म्यर ठेकुवा ठीकम ठीक

एक गाँव मैं ठेकुआ नामक व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ रहता था. वह छोटे कद का था. लोग उसकी बीबी को ठेकुए की औरत कह कर चिडाया करते थे. ठेकुआ की पत्नी को यह ठीक नहीं लगता था. परेशान होकर एक दिन वह गाँव छोड़ कर दुसरे गाँव चली गई. उसने उस गाँव मैं एक [Continue reading.....]

लछिया कोठ्यारी के किस्से - 1

लछिया कोठ्यारी के किस्से पूरे इलाके मैं प्रसिद्ध हैं. (शायद यह एक काल्पनिक पात्र है) पुराने समय मैं शाम को चौपाल मैं उसकी मूर्खता के किस्सों को चटकारे लेकर सूना व सुनाया जाता था. उसके सात पुत्र थे. उनकी मूर्खता के किस्से भी प्रसिद्ध हैं. पुराने समय की बात है पहाड़ से लोग बैलगाडियों के [Continue reading.....]

Kaphal Pakko, meil ni chakkho

Kaphal ( Myrica esculenta ) Pako – Meil ni chakkho
काफल पाक्को, मैल नि चाक्खो

Kaphal pakko, meil ni chakkho (Kaphal has ripened, but I have not yet tasted the same) is the pathetic explanation of a little girl who died of severe beating by her mother. The story goes that once a Woman picked up Kaphals [Continue reading.....]

गणतुआ -आ निनुरी आ सिनुरी, भोल तेरी मौत

यह एक पुरानी कहानी है. एक गाँव मैं एक गणतुआ रहता था. वह लोगों की समस्याओं का समाधान गणना करके किया करता था और अपना तथा अपने परिवार का जीवन यापन करता था. लोगों को उसके पर्चे लगते भी थे परन्तु गणना हमेशा तो सही नहीं हो सकती इस कारण कभी उसका धंधा ठीक चलता [Continue reading.....]

ढोलकी मैं फसकिया बूबू

एक गाँव मैं कुछ नवयुकों ने एक लड़के की शादी रचाई शादी तय करते समय कोई भी सयाना साथ मैं नहीं था शादी लगभग तय हो गई लड़के वालों ने मांग रखी की बरात मैं बकरे का शिकार भी होना चाहिए लड़की वालों ने इनकार किया इससे [Continue reading.....]

चल तुमेडी बाटे बाट मैं क्या जानू बुडिये की बात

रात्रि मैं भोजन के पश्चात निद्रा रानी के आव्हान के लिए कहानी सुनना बच्चों की दिन चर्या का एक आवश्यकीय अंग होता है. हम भी बचपन मैं रोज कहानी सुनते थे कहानी सुनते सुनते सो जाना एक साधारण बात थी.

एक दिन की बात है की रात्रि मैं हमारी दादी ने एक कहानी सुनाई ‘चल तुमेडी [Continue reading.....]

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