बेडु पाको बारो मासा……..
नैनीताल की एक रंगीन शाम. बैण्ड स्टैंड मैं राम सिंह का मिलिटरी ऑर्केस्ट्रा और बेडू पाको की धुन मैं मस्ती करते टूरिस्ट ऐसी होती थी नैनीताल की शाम . बेडू पाको सदाबहार गीत प्रस्तुत है
बेडु पाको बारो मासा, ओ नरणी काफल पाको चैता मेरी छैला
रूना भुना दिन एगो नरण पूजा मेरा मईता मेरी छैला
बेडु पाको बारो मासा नरण काफल पाको चैता मेरी छैला
आप खांछे पान सुपारी नरण मैं हूं लूँ छ बीड़ी मेरी छैला
बेडु पाको बारो मासा ओ नरण काफल पाको चैत मेरी छैला
अल्मोडा की नंदा देवी, नरण फूल चढूनी पाती मेरी छैला
बेडु पाको बारो मासा
त्यार खुटा मां कांटो बुडिगो , नरणा मेरी खुटी पीड़ा मेरी छैला
बेडु पाको बारो मासा
अल्मोडा को लाल बाज़ार, नरणा लाल माटे की सीड़ी मेरी छैला
बेडू पाको बारह मासा नरैन काफल पाको चैता मेरी छैला
This poem was written by Sri Brajendra Lal Shah
