ढोलकी मैं फसकिया बूबू

एक गाँव मैं कुछ नवयुकों ने एक लड़के की शादी रचाई शादी तय करते समय कोई भी सयाना साथ मैं नहीं था शादी लगभग तय हो गई लड़के वालों ने मांग रखी की बरात मैं बकरे का शिकार भी होना चाहिए लड़की वालों ने इनकार किया इससे झगडा बड़ता गया आख़िर लडकी वालों को बहुत गुस्सा आया और उन्हों ने कहा ठेक है, हम बकरा काटेंगे परन्तु हर बराती को एक बकरा खाना पड़ेगा तथा सारे बराती नवयुवक होने चाहिए. कोई भी बुजर्ग बराती बन कर नहीं आयेगा लड़के वालों ने हामी भर दी घर लौटकर लड़कों ने सयानों को १०० बकरों वाली समस्या बताई. तय हुवा की फसकिया बूबू बड़ी ढोलक मैं बंद होकर बरात मैं जायेंगे .

निश्चित समय पर बरात चली और साथ मैं फसकिया बूबू भी ढोलक के अन्दर चले बारातियों का स्वागत १०० बकरों से किया गया. अब समस्या आई की प्रत्येक बराती एक बकरा कैसे खायेगा लोडों ने ढोलकी के पास जाकर फस्किया बूबू से मंत्रणा की. बूबू ने कहा की एक बार मैं एक बकरा कटेगा और हर नवजवान एक एक टुकडा कच्पोली का खायेगा पहला बकरा खा लेने के बाद ही दूसरा बकरा कटेगा इस प्रकार सौ बकरे कटेंगे क्योंकि हर नवजवान को बकरे का शिकार खाने के लिए काफी समय मिल जायेगा इस प्रकार सारे बकरे निपट जायेंगे लड़की वालों ने देखा की वर पक्ष के लोग बार बार ढोलक के पास जा रहें हैं और गुन्मुन गुन्मुन बात् कर रहे हैं. लडकी वालों को शक हुवा वे ढोलक के पास आए और ढोलक खोलने पर फस्किया बूबू उसके अन्दर बिराजमान मिले लड़कों वालों की पोल खुल गई और लडकी वाले भी बूबू की बुद्धिमत्ता की दाद देने लगे कहने का मतलब है कि अनुभव और ऊर्जा दोनों का सामंजस्य होना जरूरी है.

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