चल तुमेडी बाटे बाट मैं क्या जानू बुडिये की बात

रात्रि मैं भोजन के पश्चात निद्रा रानी के आव्हान के लिए कहानी सुनना बच्चों की दिन चर्या का एक आवश्यकीय अंग होता है. हम भी बचपन मैं रोज कहानी सुनते थे कहानी सुनते सुनते सो जाना एक साधारण बात थी.

एक दिन की बात है की रात्रि मैं हमारी दादी ने एक कहानी सुनाई ‘चल तुमेडी बाटे बाट मैं क्या जानू बुडिये की बात’ दादी ने बताया की एक गाँव मैं एक शेर लगा था वह दिन दहाड़े आकर आदमियों का शिकार करता था गाँव के लोगो ने शेर से फरियाद की की वह एक बार मैं एक ही आदमी को शिकार बनाए जंगल का राजा शेर राजी हो गया क्योंकि उसे बिना मेहनत के शिकार जो मिल रहा था. तब से बारी बारी लोग शेर का शिकार बनने लगे एक दफा एक चतुर बुडिया की बारी आइ वह शेर का निवाला नहीं बनना चाहती थी अतः उसने स्वयं को एक तुमडी मैं बंद कर लिया तथा गाँव वालों से कहा कि उसे घुरया दें तुमडी घुरीते घुरीते जा रही थी कि शेर कि उस पर नज़र पड़ गयी. उसने तुमडी को रोका और कहा की मेरा शिकार कहाँ हैं बुडिया बोली चल तुमेडी बाटे बाट मैं क्या जानू बुडिये की बात इस प्रकार बुडिया बच गई उसने चतुराई से अपनी जान बचा ली

दूसरी कहानी के अनुसार जब शेर नहीं माना तो बुडिया ने शेर को समझाया कि वह अपने नाती के पास जा रही है अभी वह दुबली पतली है नाती के पास जाकर लोटते वक्त काफ़ी मोटी हो जाउंगी तब मुझे खाना शेर राजी हो गया और चतुर बुडिया ने अपनी जान बच्चा ली कहानी सुनते सुनते मैं कब सो गया मुझे पता नहीं.

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